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mahabharat 7.150.23: अब मेरे जीवित रहने से क्या लाभ है, जबकि मैंने काम्बोजराज, अलम्बुष और अन्य अनेक मित्रों को मारा हुआ देख लिया है? ॥23॥   |   mahabharat अध्याय 7.150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.150.23 
काम्बोजं निहतं दृष्ट्वा तथालम्बुषमेव च।
अन्यान् बहूंश्च सुहृदो जीवितार्थोऽद्य को मम॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अब मेरे जीवित रहने से क्या लाभ है, जबकि मैंने काम्बोजराज, अलम्बुष और अन्य अनेक मित्रों को मारा हुआ देख लिया है? ॥23॥
 
What is the point of my remaining alive now, when I have seen Kambojaraj, Alambusha and many other friends killed? ॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)