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mahabharat 7.150.20: मेरे पितामह भीष्म राजाओं के बीच युद्धभूमि में मारे गए और अब रक्त से लथपथ होकर बाणों की शय्या पर लेटे हुए हैं; परन्तु मैं उनकी रक्षा नहीं कर सका।   |   mahabharat अध्याय 7.150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.150.20 
योऽहं रुधिरसिक्ताङ्गं राज्ञां मध्ये पितामहम्।
शयानं नाशकं त्रातुं भीष्ममायोधने हतम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मेरे पितामह भीष्म राजाओं के बीच युद्धभूमि में मारे गए और अब रक्त से लथपथ होकर बाणों की शय्या पर लेटे हुए हैं; परन्तु मैं उनकी रक्षा नहीं कर सका।
 
My grandfather Bhishma was killed on the battlefield among kings and is now lying soaked in blood on a bed of arrows; but I could not protect him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)