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mahabharat 7.150.17: मैं कायर हूँ; इस प्रकार अपने मित्रों को मारकर मैं हजारों अश्वमेध यज्ञ करके भी अपने को शुद्ध नहीं कर सकता ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 7.150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.150.17 
सोऽहं कापुरुष: कृत्वा मित्राणां क्षयमीदृशम्।
अश्वमेधसहस्रेण पावितुुुुं न समुत्सहे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
मैं कायर हूँ; इस प्रकार अपने मित्रों को मारकर मैं हजारों अश्वमेध यज्ञ करके भी अपने को शुद्ध नहीं कर सकता ॥17॥
 
I am a coward; after killing my friends in this manner I cannot purify myself even by performing thousands of Ashwamedha sacrifices. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)