Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.150.14-15: सव्यसाची अर्जुन ने मेरी सात अक्षौहिणी सेनाओं का नाश कर दिया है और आपके दूसरे महाप्रतापी शिष्य राजा जयद्रथ को भी मार डाला है। मेरे वे सब सहायक मित्र जो मुझे विजयी बनाना चाहते थे और युद्ध में अपने प्राण त्यागकर यमलोक चले गए हैं, उनका ऋण मैं कैसे चुका पाऊँगा?॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 7.150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सव्यसाची अर्जुन ने मेरी सात अक्षौहिणी सेनाओं का नाश कर दिया है और आपके दूसरे महाप्रतापी शिष्य राजा जयद्रथ को भी मार डाला है। मेरे वे सब सहायक मित्र जो मुझे विजयी बनाना चाहते थे और युद्ध में अपने प्राण त्यागकर यमलोक चले गए हैं, उनका ऋण मैं कैसे चुका पाऊँगा?॥14-15॥
Savyasachi Arjun has destroyed my seven Akshauhini armies and has also killed your other fierce disciple King Jayadrath. How will I be able to repay the debt of all those helpful friends of mine who wanted to make me victorious and have sacrificed their lives in the war and have gone to Yamaloka?॥14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥