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mahabharat 7.150.10: राजन! भरतश्रेष्ठ! सम्पूर्ण जगत् के प्रति अपराध करने वाला आपका पुत्र जब इस प्रकार विचार करके हृदय में अत्यन्त दुःखी हो गया, तब आचार्य उसे देखने के लिए द्रोण के पास गए॥10॥   |   mahabharat अध्याय 7.150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.150.10 
एवं क्लान्तमना राजन्नुपायाद् द्रोणमीक्षितुम्।
आगस्कृत् सर्वलोकस्य पुत्रस्ते भरतर्षभ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजन! भरतश्रेष्ठ! सम्पूर्ण जगत् के प्रति अपराध करने वाला आपका पुत्र जब इस प्रकार विचार करके हृदय में अत्यन्त दुःखी हो गया, तब आचार्य उसे देखने के लिए द्रोण के पास गए॥10॥
 
Rajan! Bharatshrestha! When your son, who had committed crimes against the entire world, became very sad in his heart thinking like this, then Acharya went to Drona to see him. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)