श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 15: शल्यके साथ भीमसेनका युद्ध तथा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.15.5 
तं दीप्तमिव कालाग्निं दण्डहस्तमिवान्तकम्।
जवेनाभ्यपतद् भीम: प्रगृह्य महतीं गदाम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
प्रलयकाल की प्रज्वलित अग्नि के समान तथा गदा लिये हुए यमराज के समान उसे अपनी ओर आते देख भीमसेन अपनी विशाल गदा हाथ में लेकर बड़े वेग से उसकी ओर दौड़े।
 
Seeing him approaching like the blazing fire of the time of doom and like Yamaraja holding a mace, Bhimasena ran towards him with great speed, taking up his huge mace in his hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)