श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 15: शल्यके साथ भीमसेनका युद्ध तथा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.15.4 
संजय उवाच
सादितं प्रेक्ष्य यन्तारं शल्य: सर्वायसीं गदाम्।
समुत्क्षिप्य नदन् क्रुद्ध: प्रचस्कन्द रथोत्तमात्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
संजय बोले, 'हे राजन! अपने सारथि को मारा गया देखकर राजा शल्य अत्यन्त क्रोधित हो गए। वे गर्जना करते हुए अपने उत्तम रथ से कूद पड़े और अपनी लोहे की बनी हुई गदा उठा ली।
 
Sanjaya said, 'O King! King Shalya became very angry on seeing his charioteer killed. He jumped from his excellent chariot roaring, picking up his mace made entirely of iron.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)