श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 15: शल्यके साथ भीमसेनका युद्ध तथा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.15.37 
सिंहनादान् भृशं चक्रु: शङ्खान् दध्मुश्च हर्षिता:।
भेरीश्च वादयामासुर्मृदङ्गांश्चानकै: सह॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अत्यन्त प्रसन्न होकर बारम्बार गर्जना की और अनेक शंख बजाए; तथा भेरी, मृदंग और आनक आदि भी बजवाए।
 
In great joy he roared repeatedly and blew many conches; and he also caused the bheri, mridanga and aanaka etc. to be played.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणाभिषेकपर्वणि शल्यापयाने पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणाभिषेकपर्वमें शल्यका पलायनविषयक पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)