उन्होंने अत्यन्त प्रसन्न होकर बारम्बार गर्जना की और अनेक शंख बजाए; तथा भेरी, मृदंग और आनक आदि भी बजवाए।
In great joy he roared repeatedly and blew many conches; and he also caused the bheri, mridanga and aanaka etc. to be played.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणाभिषेकपर्वणि शल्यापयाने पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणाभिषेकपर्वमें शल्यका पलायनविषयक पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)