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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 15: शल्यके साथ भीमसेनका युद्ध तथा शल्यकी पराजय
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श्लोक 33
श्लोक
7.15.33
क्षीबवद् विह्वलो वीरो निमेषात् पुनरुत्थित:।
भीमोऽपि सुमहाबाहुर्गदापाणिरदृश्यत॥ ३३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबाहु भीमसेन भी उन्मत्त की भाँति मूर्च्छित होकर पलक झपकते ही उठ खड़े हुए और उनके हाथ में गदा दिखाई दी।
Thereafter the mighty-armed warrior Bhimasena too, in a trance like a madman, stood up in the blink of an eye and was seen holding a mace in his hand.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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