श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 15: शल्यके साथ भीमसेनका युद्ध तथा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.15.32 
तत: स्वरथमारोप्य मद्राणामधिपं रणे।
अपोवाह रणात् तूर्णं कृतवर्मा महारथ:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर महायोद्धा कृतवर्मा ने मद्रराज शल्य को अपने रथ पर बिठाया और तुरन्त ही युद्धभूमि से बाहर ले गए।
 
Seeing this, the great warrior Kritavarma placed the Madra king Shalya on his chariot and immediately took him out of the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)