श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 15: शल्यके साथ भीमसेनका युद्ध तथा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.15.31 
दृष्ट्वा चैनं महाराज गदयाभिनिपीडितम्।
विचेष्टन्तं यथा नागं मूर्च्छयाभिपरिप्लुतम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि राजा शल्य गदा से घायल होकर बेहोश होकर घायल सर्प की भाँति पीड़ा से तड़प रहे हैं।
 
Maharaj! On arriving there he saw that King Shalya was writhing in pain like a wounded snake, wounded by the mace and unconscious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)