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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 15: शल्यके साथ भीमसेनका युद्ध तथा शल्यकी पराजय
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श्लोक 19
श्लोक
7.15.19
गदा क्षिप्ता तु समरे मद्रराजेन भारत।
व्योम दीपयमाना सा ससृजे पावकं मुहु:॥ १९॥
अनुवाद
तब मद्रराज शल्य ने युद्धभूमि में अपनी दूसरी गदा चलाई, जिससे आकाश प्रकाशित हो गया और बार-बार अंगारे बरसने लगे।
Then the Madra king Shalya swung his second mace on the battlefield which illuminated the sky and showered embers again and again.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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