Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.15.18: इसी प्रकार जब भीमसेन की गदा पर शत्रुओं ने आक्रमण किया तो उसमें से चिंगारियाँ निकलने लगीं और वह वर्षा ऋतु की संध्या में जुगनुओं से जगमगाते वृक्ष के समान दिखाई देने लगी।   |   mahabharat अध्याय 7.15: शल्यके साथ भीमसेनका युद्ध तथा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 15: शल्यके साथ भीमसेनका युद्ध तथा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.15.18 
तथैव भीमसेनस्य द्विषताभिहता गदा।
वर्षाप्रदोषे खद्योतैर्वृतो वृक्ष इवाबभौ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार जब भीमसेन की गदा पर शत्रुओं ने आक्रमण किया तो उसमें से चिंगारियाँ निकलने लगीं और वह वर्षा ऋतु की संध्या में जुगनुओं से जगमगाते वृक्ष के समान दिखाई देने लगी।
 
Similarly, when Bhimasena's mace was attacked by the enemy, it started emitting sparks and looked like a tree glittering with fireflies during the evening of the rainy season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)