श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 15: शल्यके साथ भीमसेनका युद्ध तथा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.15.10 
पश्यतां शतशो ह्यासीदन्योन्यमभिधावताम्।
पाण्डवानां कुरूणां च साधु साध्विति नि:स्वन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सैकड़ों दर्शकों, कौरवों और पाण्डवों की एक दूसरे की ओर दौड़ती हुई धन्यवाद की ऊँची पुकारें सर्वत्र गूँज उठीं॥10॥
 
The loud cries of thanks from hundreds of spectators, Kauravas and Pandavas, running towards one another, resounded everywhere.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)