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श्लोक  7.149.9-10 
किं तु नात्यद्भुतं तेषां येषां नस्त्वं समाश्रय:।
न तेषां दुष्कृतं किंचित् त्रिषु लोकेषु विद्यते॥ ९॥
सर्वलोकगुरुर्येषां त्वं नाथो मधुसूदन।
त्वत्प्रसादाद्धि गोविन्द वयं जेष्यामहे रिपून्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
परन्तु हम लोगों में से जो आपके शरणागत हैं, उनके लिए विजय और सौभाग्य कोई विशेष बात नहीं है। मुधुसूदन! जिनके रक्षक आप हैं, जो सम्पूर्ण जगत के गुरु हैं, उनके लिए तीनों लोकों में कोई भी कार्य कठिन नहीं है। गोविन्द! आपकी कृपा से हम अवश्य ही अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे।॥ 9-10॥
 
‘But for those of us who are your refuge, victory and good fortune is not a very strange thing. Mudhusudana! There is nothing difficult in the three worlds for those whose protector is you, the Guru of the entire universe. Govinda! We will certainly be victorious over our enemies by your grace.॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)