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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 149: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे विजयका समाचार सुनाना और युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा अर्जुन, भीम एवं सात्यकिका अभिनन्दन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  7.149.62 
तत: प्रमुदितं सर्वं बलमासीद् विशाम्पते।
पाण्डवानां रणे हृष्टं युद्धाय तु मनो दधे॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! उसके बाद पाण्डवों की सारी सेना युद्धभूमि में प्रसन्न और उत्साहित होकर युद्ध में लग गयी।
 
Prajanath! After that, the entire army of Pandavas became happy and excited in the battlefield and concentrated on fighting.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि युधिष्ठिरहर्षे एकोनपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें युधिष्ठिरका हर्षविषयक एक सौ उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)