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mahabharat 7.149.56-57: हमारे सौभाग्य से ही आचार्य द्रोण और महाबली कृतवर्मा युद्ध में पराजित हुए। सौभाग्य से कर्ण भी आपके बाणों से रणभूमि में पराजित हुआ। हे वीरश्रेष्ठ! आप दोनों ने राजा शल्य को भी युद्ध से विमुख कर दिया था। 56-57॥   |   mahabharat अध्याय 7.149: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे विजयका समाचार सुनाना और युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा अर्जुन, भीम एवं सात्यकिका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 149: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे विजयका समाचार सुनाना और युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा अर्जुन, भीम एवं सात्यकिका अभिनन्दन  »  श्लोक 56-57
 
 
श्लोक  7.149.56-57 
दिष्टॺा द्रोणोजित: संख्ये हार्दिक्यश्च महाबल:॥ ५६॥
दिष्टॺा विकर्णिभि: कर्णो रणे नीत: पराभवम्।
विमुखश्च कृत: शल्यो युवाभ्यां पुरुषर्षभौ॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हमारे सौभाग्य से ही आचार्य द्रोण और महाबली कृतवर्मा युद्ध में पराजित हुए। सौभाग्य से कर्ण भी आपके बाणों से रणभूमि में पराजित हुआ। हे वीरश्रेष्ठ! आप दोनों ने राजा शल्य को भी युद्ध से विमुख कर दिया था। 56-57॥
 
It was due to our good fortune that Acharya Drona and Mahabali Kritavarma were defeated in the war. Luckily, Karna was also defeated in the battlefield by your arrows. The best hero! Both of you also turned King Shalya away from the war. 56-57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)