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श्लोक  7.149.46 
हन्यन्ते निहताश्चैव विनङ्क्ष्यन्ति च भारत।
तव क्रोधहता ह्येते कौरवा: शत्रुसूदन॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
भरत! शत्रुघ्न! ये सब कौरव आपके क्रोध से ही नष्ट होकर मारे गये हैं, मारे जा रहे हैं और आगे भी मारे जायेंगे।
 
Bharat! Shatrughan! All these Kauravas have been destroyed and killed by your anger, are being killed and will be killed in the future too.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)