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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 149: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे विजयका समाचार सुनाना और युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा अर्जुन, भीम एवं सात्यकिका अभिनन्दन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.149.43 
एवमुक्त्वा गुडाकेशं धर्मराजो महायशा:।
पस्पर्श पुण्यगन्धेन पृष्ठे हस्तेन पार्थिव:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर धर्मराज युधिष्ठिर ने निद्राविजयी अर्जुन से पवित्र सुगन्धि से भरा हुआ हाथ उनकी पीठ पर फेरा ॥43॥
 
Having said this to the sleep-conquering Arjuna, the great king of Dharma, King Yudhishthira, rubbed his hand filled with sacred fragrance on his back. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)