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mahabharat 7.149.42: शत्रुसूदन! आज तुम अपने शत्रु का वध करके अपनी प्रतिज्ञा के भार से मुक्त हो गए हो। यह सौभाग्य की बात है। जयद्रथ का वध करके तुमने अपनी प्रतिज्ञा सत्य सिद्ध कर दी, यह भी हर्ष की बात है।॥42॥   |   mahabharat अध्याय 7.149: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे विजयका समाचार सुनाना और युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा अर्जुन, भीम एवं सात्यकिका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.149.42 
दिष्टॺा निस्तीर्णभारोऽसि हतारिश्चासि शत्रुहन्।
दिष्टॺा सत्या प्रतिज्ञेयं कृता हत्वा जयद्रथम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन! आज तुम अपने शत्रु का वध करके अपनी प्रतिज्ञा के भार से मुक्त हो गए हो। यह सौभाग्य की बात है। जयद्रथ का वध करके तुमने अपनी प्रतिज्ञा सत्य सिद्ध कर दी, यह भी हर्ष की बात है।॥42॥
 
‘Shatrusudan! Today you have become free from the burden of your promise by killing your enemy. This is a matter of good fortune. It is a matter of joy that you proved your promise true by killing Jayadratha.'॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)