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श्लोक  7.149.40 
ततो धर्मसुतो जिष्णुं परिष्वज्य विशाम्पते।
प्रमृज्य वदनं तस्य पर्याश्वासयत प्रभु:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! तब धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अर्जुन को गले लगाया और उसका मुख पोंछकर उसे आश्वासन देते हुए कहा -॥40॥
 
Prajanath! Then King Yudhishthira, the son of Dharma, embraced Arjuna and wiping his face, assured him saying -॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)