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श्लोक  7.149.36 
भवता तपसोग्रेण धर्मेण परमेण च।
साधुत्वादार्जवाच्चैव हत: पापो जयद्रथ:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज! आपके घोर तप, परम धर्म, साधुता और सरलता के कारण ही पापी जयद्रथ मारा गया है॥ 36॥
 
‘Dharmaraj! It is because of your intense penance, supreme religion, saintliness and simplicity that the sinful Jayadratha has been killed.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)