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mahabharat 7.149.31-32: आपका रहस्य गहन है। आप ही सबका मूल कारण और इस ब्रह्माण्ड के स्वामी हैं। आप ही परात्पर देव, नारायण, परमात्मा और ईश्वर हैं। आप ही ज्ञान के साक्षात् स्वरूप श्री हरि और साधकों के परम आश्रय भगवान विष्णु हैं। देवता भी आपके वास्तविक स्वरूप को नहीं जानते। आप परम पुराणपुरुष हैं और पुराणों से भी परे हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.149: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे विजयका समाचार सुनाना और युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा अर्जुन, भीम एवं सात्यकिका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.149.31-32 
अपि देवा न जानन्ति गुह्यमाद्यं जगत‍्पतिम्॥ ३१॥
नारायणं परं देवं परमात्मानमीश्वरम्।
ज्ञानयोनिं हरिं विष्णुं मुमुक्षूणां परायणम्।
परं पुराणं पुरुषं पुराणानां परं च यत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
आपका रहस्य गहन है। आप ही सबका मूल कारण और इस ब्रह्माण्ड के स्वामी हैं। आप ही परात्पर देव, नारायण, परमात्मा और ईश्वर हैं। आप ही ज्ञान के साक्षात् स्वरूप श्री हरि और साधकों के परम आश्रय भगवान विष्णु हैं। देवता भी आपके वास्तविक स्वरूप को नहीं जानते। आप परम पुराणपुरुष हैं और पुराणों से भी परे हैं।
 
‘Your mystery is profound. You are the root cause of everything and the master of this universe. You are the supreme god, Narayana, Paramatma and Ishwar. You are the embodiment of knowledge Shri Hari and the ultimate refuge of seekers, Lord Vishnu. Even the gods do not know your true form. You are the supreme Puranpurush and are beyond the Puranas as well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)