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mahabharat 7.149.16: हे वीर हृषीकेश! आपकी कृपा से ही यह जगत्, चाहे स्थावर हो या स्थावर, अपनी मर्यादा में रहकर जप-तप आदि पुण्य कर्मों में लगा रहता है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 7.149: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे विजयका समाचार सुनाना और युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा अर्जुन, भीम एवं सात्यकिका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.149.16 
त्वत्प्रसादाद्‍धृषीकेश जगत‍् स्थावरजङ्गमम्।
स्ववर्त्मनि स्थितं वीर जपहोमेषु वर्तते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे वीर हृषीकेश! आपकी कृपा से ही यह जगत्, चाहे स्थावर हो या स्थावर, अपनी मर्यादा में रहकर जप-तप आदि पुण्य कर्मों में लगा रहता है॥16॥
 
Valiant Hrishikesh! It is because of your grace that this world, whether mobile or immobile, stays within its limits and is engaged in virtuous deeds like chanting and performing homas.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)