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mahabharat 7.148.d2-d3: सारथिपुत्र! तुमने भी पुनः युद्ध किया और केवल एक बार भगवान की इच्छा से तुमने वीर पाण्डुपुत्र भीमसेन को रथहीन कर दिया। राधापुत्र! तुमने भीम को कटु वचन सुनाकर अपने कुल के अनुसार कार्य किया है।'   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक d2-d3
 
 
श्लोक  7.148.d2-d3 
भूयस्त्वमपि सङ्गम्य सकृदेव यदृच्छया॥
विरथं कृतवान् वीरं पाण्डवं सूतदायद।
कुलस्य सदृशं चापि राधेय कृतवानसि॥
 
 
अनुवाद
सारथिपुत्र! तुमने भी पुनः युद्ध किया और केवल एक बार भगवान की इच्छा से तुमने वीर पाण्डुपुत्र भीमसेन को रथहीन कर दिया। राधापुत्र! तुमने भीम को कटु वचन सुनाकर अपने कुल के अनुसार कार्य किया है।'
 
‘Son of a charioteer! You too fought again and only once by the will of God, you made the brave son of Pandu, Bhimasena, chariotless. Son of Radha! You have acted in accordance with your lineage by speaking harsh words to Bhima.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)