Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.148.d1: हे निर्लज्ज कर्ण! तू युद्ध से बार-बार भागता रहता है, फिर भी भीमसेन ने तेरे भागते समय तुझसे एक शब्द भी नहीं कहा। भीमसेन की इस महानता को तथा कुलीन कुल में जन्म लेने के कारण उसके उत्तम चरित्र और स्वभाव को देख। | mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे निर्लज्ज कर्ण! तू युद्ध से बार-बार भागता रहता है, फिर भी भीमसेन ने तेरे भागते समय तुझसे एक शब्द भी नहीं कहा। भीमसेन की इस महानता को तथा कुलीन कुल में जन्म लेने के कारण उसके उत्तम चरित्र और स्वभाव को देख।
O shameless Karna! You keep running away from the battle again and again, yet Bhimsena never said a harsh word to you while you were running away. See this greatness of Bhimsena and the good character and nature he has acquired due to his birth in a noble family.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥