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mahabharat 7.148.8: कर्ण! कर्ण! तुम्हारी दृष्टि मिथ्या है। सारथिपुत्र! तुम अपनी प्रशंसा स्वयं करते हो। हे अधर्मी मूर्ख! इस समय मैं जो कुछ तुमसे कह रहा हूँ, उसे सुनो।   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.148.8 
कर्ण कर्ण वृथादृष्टे सूतपुत्रात्मसंस्तुत।
अधर्मबुद्धे शृणु मे यत् त्वां वक्ष्यामि साम्प्रतम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! कर्ण! तुम्हारी दृष्टि मिथ्या है। सारथिपुत्र! तुम अपनी प्रशंसा स्वयं करते हो। हे अधर्मी मूर्ख! इस समय मैं जो कुछ तुमसे कह रहा हूँ, उसे सुनो।
 
Karna! Karna! Your vision is wrong. Son of a charioteer! You praise yourself. You irreligious fool! Listen to what I am telling you at this time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)