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mahabharat 7.148.6: हे पुरुषोत्तम! कर्णवध के लिए मेरे वचनों पर ध्यान दो। धनंजय! मेरी प्रतिज्ञा को पूर्ण करने का पूर्ण प्रयास करो।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.148.6 
तद्वधाय नरश्रेष्ठ स्मरैतद् वचनं मम।
यथा भवति तत् सत्यं तथा कुरु धनंजय॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! कर्णवध के लिए मेरे वचनों पर ध्यान दो। धनंजय! मेरी प्रतिज्ञा को पूर्ण करने का पूर्ण प्रयास करो।॥6॥
 
Best of men! Pay attention to my words for the killing of Karna. Dhananjaya! Make every effort to make my promise come true.'॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)