Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.148.57: हे प्रभु! रणभूमि में इस महान् एवं यशस्वी कार्य को करने की शक्ति केवल आपमें तथा महायुद्ध में दैत्यों और दानवों का नाश करने वाले देवराज इन्द्र में ही सम्भव है॥57॥   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  7.148.57 
इदं महत् त्वय्युपपद्यते प्रभो
रणाजिरे कर्म यशोभिवर्धनम्।
शतक्रतौ चापि च देवसत्तमे
महाहवे जघ्नुषि दैत्यदानवान्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! रणभूमि में इस महान् एवं यशस्वी कार्य को करने की शक्ति केवल आपमें तथा महायुद्ध में दैत्यों और दानवों का नाश करने वाले देवराज इन्द्र में ही सम्भव है॥57॥
 
O Lord! The power to perform this great and glorious deed in the battlefield is only possible in you and in Devraja Indra who destroys demons and devils in the great war. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)