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mahabharat 7.148.55: महाबाहो! उन योद्धाओं की दशा तो देखो, जिनके शरीर तुम्हारे बाणों से छिन्न-भिन्न हो रहे हैं। उनके केश धूल से ढँके हुए हैं और वे सम्पूर्ण शरीर से पृथ्वी का आलिंगन करके सो रहे हैं।॥55॥   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.148.55 
महीमालिङ्गॺ सर्वाङ्गै: पांसुध्वस्तशिरोरुहान्।
पश्य योधान् महाबाहो त्वच्छरैर्भिन्नविग्रहान्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! उन योद्धाओं की दशा तो देखो, जिनके शरीर तुम्हारे बाणों से छिन्न-भिन्न हो रहे हैं। उनके केश धूल से ढँके हुए हैं और वे सम्पूर्ण शरीर से पृथ्वी का आलिंगन करके सो रहे हैं।॥55॥
 
Mahabaho! Look at the condition of those warriors whose bodies are being torn apart by your arrows. Their hair is covered in dust and they are sleeping embracing the earth with their entire body. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)