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mahabharat 7.148.54: हे वीर! अपने सैकड़ों-हजारों गिरे हुए पैदल सैनिकों को देखो, जो रक्त से लथपथ होकर, धनुष और ढाल हाथ में लिए हुए भूमि पर पड़े हैं॥54॥   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  7.148.54 
पत्तींश्च निहतान् वीर शतशोऽथ सहस्रश:।
धनुर्भृतश्चर्मभृत: शयानान् रुधिरोक्षितान्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! अपने सैकड़ों-हजारों गिरे हुए पैदल सैनिकों को देखो, जो रक्त से लथपथ होकर, धनुष और ढाल हाथ में लिए हुए भूमि पर पड़े हैं॥54॥
 
Brave! Look at the hundreds and thousands of your fallen foot soldiers, who are lying on the ground covered in blood, with their bows and shields in their hands. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)