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mahabharat 7.148.53: हे प्रभु! इन रथों के कूबड़ और जुए टूट गए हैं। डंडे टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं और इन्हें बाँधने वाली रस्सियाँ टुकड़े-टुकड़े हो गई हैं। हे पार्थ! ज़मीन पर पड़े इन घोड़ों को देखो, ये हवाई जहाज़ जैसे लग रहे हैं। 53.   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.148.53 
निकृत्तकूबरयुगान् भग्नेषाबन्धुरान् प्रभो।
पश्य पार्थ हयान् भूमौ विमानोपमदर्शनान्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! इन रथों के कूबड़ और जुए टूट गए हैं। डंडे टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं और इन्हें बाँधने वाली रस्सियाँ टुकड़े-टुकड़े हो गई हैं। हे पार्थ! ज़मीन पर पड़े इन घोड़ों को देखो, ये हवाई जहाज़ जैसे लग रहे हैं। 53.
 
O Lord! The humps and yokes of these chariots have been broken. The staffs have been broken into pieces and the ropes that hold them have been torn to pieces. O Partha! Look at these horses lying on the ground, they look like airplanes. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)