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mahabharat 7.148.51-52: इन स्वर्णमयी जीनों और आभूषणों से विभूषित घोड़ों को तो देखो, ये भी प्राणशून्य पड़े हैं। जिनके स्वामी मारे गए हैं, ये रथ गंधर्वनगर के समान प्रतीत होते हैं। इनके ध्वज, पताकाएँ और धुरे टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं, पहिये नष्ट हो गए हैं और सारथि भी मारे गए हैं। ॥51-52॥   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 51-52
 
 
श्लोक  7.148.51-52 
हयांश्च पतितान् पश्य स्वर्णभाण्डविभूषितान्॥ ५१॥
गन्धर्वनगराकारान् रथांश्च निहतेश्वरान्।
छिन्नध्वजपताकाक्षान् विचक्रान् हतसारथीन्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
इन स्वर्णमयी जीनों और आभूषणों से विभूषित घोड़ों को तो देखो, ये भी प्राणशून्य पड़े हैं। जिनके स्वामी मारे गए हैं, ये रथ गंधर्वनगर के समान प्रतीत होते हैं। इनके ध्वज, पताकाएँ और धुरे टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं, पहिये नष्ट हो गए हैं और सारथि भी मारे गए हैं। ॥51-52॥
 
Look at these horses adorned with golden saddles and ornaments, they too are lying lifeless. These chariots whose masters have been killed look like Gandharvanagar. Their flags, banners and axles have been torn to pieces, the wheels have been destroyed and the charioteers have also been killed. ॥51-52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)