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mahabharat 7.148.5: महाबाहु कुन्तीकुमार! मैंने आपसे यह प्रतिज्ञा की थी कि मैं ऐसा कहने वाले का वध करूँगा। जिस प्रकार कर्ण का वध मेरा कार्य है, उसी प्रकार कर्ण का वध आपका भी कार्य है, इसमें संशय नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.148.5 
एतद् व्रतं महाबाहो त्वया सह कृतं मया।
तथैतन्मम कौन्तेय यथा तव न संशय:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु कुन्तीकुमार! मैंने आपसे यह प्रतिज्ञा की थी कि मैं ऐसा कहने वाले का वध करूँगा। जिस प्रकार कर्ण का वध मेरा कार्य है, उसी प्रकार कर्ण का वध आपका भी कार्य है, इसमें संशय नहीं है।
 
‘Mahabahu Kuntikumar! I had made this vow to you to kill the one who said this. Just as killing Karna is my task, so is killing Karna yours too, there is no doubt about this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)