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mahabharat 7.148.48-49h: इस पृथ्वी के राज्य के लिए मारा गया पृथ्वी का राजा, अपने समस्त अंगों से इस पृथ्वी को अपनी प्रियतमा के समान आलिंगन करता हुआ इस पृथ्वी पर सो रहा है ॥48 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  7.148.48-49h 
पृथिव्यां पृथिवीहेतो: पृथिवीपतयो हता:॥ ४८॥
पृथिवीमुपगुह्याङ्गै: सुप्ता: कान्तामिव प्रियाम्।
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी के राज्य के लिए मारा गया पृथ्वी का राजा, अपने समस्त अंगों से इस पृथ्वी को अपनी प्रियतमा के समान आलिंगन करता हुआ इस पृथ्वी पर सो रहा है ॥48 1/2॥
 
The King of the Earth, who was killed for the kingdom of this earth, is sleeping on this earth, embracing this earth like his beloved with all his body parts. ॥ 48 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)