Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.148.40-41: भारत! यह युद्धभूमि कवच, ढाल, हार, कुण्डल, पगड़ी, मुकुट, माला, पाँव के कुण्डल, वस्त्र, कंठहार, बाजूबंद, चमकते हुए हार और अन्य विचित्र आभूषणों से सर्वत्र शोभा पा रही है ॥40-41॥ | mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वर्मभिश्चर्मभिर्हारै: शिरोभिश्च सकुण्डलै:।
उष्णीषैर्मुकुटै: स्रग्भिश्चूडामणिभिरम्बरै:॥ ४०॥
कण्ठसूत्रैरङ्गदैश्च निष्कैरपि च सप्रभै:।
अन्यैश्चाभरणैश्चित्रैर्भाति भारत मेदिनी॥ ४१॥
अनुवाद
भारत! यह युद्धभूमि कवच, ढाल, हार, कुण्डल, पगड़ी, मुकुट, माला, पाँव के कुण्डल, वस्त्र, कंठहार, बाजूबंद, चमकते हुए हार और अन्य विचित्र आभूषणों से सर्वत्र शोभा पा रही है ॥40-41॥
Bharat! This battlefield is being greatly adorned with armour, shields, necklaces, ear-ringed headgear, turbans, crowns, garlands, toe rings, clothes, neck-strings, armlets, shining necklaces and other strange ornaments lying all around. ॥ 40-41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥