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mahabharat 7.148.37: उसके हथियार और आभूषण बिखर गए हैं, उसके घोड़े, रथ और हाथी नष्ट हो गए हैं और उसके प्राण छिन्न-भिन्न हो गए हैं, जिससे राजा को बड़ा कष्ट हो रहा है ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.148.37 
विकीर्णशस्त्राभरणा विपन्नाश्वरथद्विपा:।
संछिन्नभिन्नमर्माणो वैक्लव्यं परमं गता:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उसके हथियार और आभूषण बिखर गए हैं, उसके घोड़े, रथ और हाथी नष्ट हो गए हैं और उसके प्राण छिन्न-भिन्न हो गए हैं, जिससे राजा को बड़ा कष्ट हो रहा है ॥37॥
 
His arms and ornaments are scattered about, his horses, chariots and elephants are destroyed and his vital parts have been lacerated, due to which the king is in great distress. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)