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mahabharat 7.148.33-34: केशव! आप जिनकी रक्षा करते हैं, उनकी विजय में कोई आश्चर्य नहीं है। आपकी कृपा से राजा युधिष्ठिर सम्पूर्ण लोकों का राज्य प्राप्त करेंगे। हे वृष्णिपुत्र! प्रभु! यह आपका प्रभाव और आपकी विजय है। मधुसूदन! हम सदैव आपकी कृपा के पात्र रहेंगे।॥ 33-34॥   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  7.148.33-34 
अनाश्चर्यो जयस्तेषां येषां नाथोऽसि केशव॥ ३३॥
त्वत्प्रसादान्महीं कृत्स्नां सम्प्राप्स्यति युधिष्ठिर:।
तव प्रभावो वार्ष्णेय तवैव विजय: प्रभो।
वर्धनीयास्तव वयं सदैव मधुसूदन॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
केशव! आप जिनकी रक्षा करते हैं, उनकी विजय में कोई आश्चर्य नहीं है। आपकी कृपा से राजा युधिष्ठिर सम्पूर्ण लोकों का राज्य प्राप्त करेंगे। हे वृष्णिपुत्र! प्रभु! यह आपका प्रभाव और आपकी विजय है। मधुसूदन! हम सदैव आपकी कृपा के पात्र रहेंगे।॥ 33-34॥
 
‘Keshav! There is nothing surprising in the victory of those whom you protect. By your grace, King Yudhishthira will gain the kingdom of the whole world. O son of Vrishni! Lord! This is your influence and your victory. Madhusudan! We will always be worthy of your blessings.'॥ 33-34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)