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mahabharat 7.148.27-28h: मानसिंह! बहुत सोचने पर भी मुझे तीनों लोकों में तुम्हारे अतिरिक्त कोई दूसरा पुरुष नहीं दिखाई देता जो इस सेना से युद्ध कर सके॥27 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.148.27-28h 
न तं पश्यामि लोकेषु चिन्तयन् पुरुषं क्वचित्॥ २७॥
त्वदृते पुरुषव्याघ्र य एतद् योधयेद् बलम्।
 
 
अनुवाद
मानसिंह! बहुत सोचने पर भी मुझे तीनों लोकों में तुम्हारे अतिरिक्त कोई दूसरा पुरुष नहीं दिखाई देता जो इस सेना से युद्ध कर सके॥27 1/2॥
 
Mansingh! Even after much thinking, I do not see any other man in the three worlds other than you who can fight with this army.॥ 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)