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mahabharat 7.148.22-23h: जब अर्जुन ने कर्णपुत्र वृषसेन को मारने की प्रतिज्ञा की, तब वहाँ रथियों में बड़ा भयंकर कोलाहल मच गया।   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  7.148.22-23h 
अर्जुनेन प्रतिज्ञाते वधे कर्णसुतस्य तु॥ २२॥
महान् सुतुमुल: शब्दो बभूव रथिनां तदा।
 
 
अनुवाद
जब अर्जुन ने कर्णपुत्र वृषसेन को मारने की प्रतिज्ञा की, तब वहाँ रथियों में बड़ा भयंकर कोलाहल मच गया।
 
When Arjuna thus vowed to kill Karna's son Vrishasena, there was a great and dreadful uproar of charioteers there. 22 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)