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mahabharat 7.148.2: संजय ने कहा- हे राजन! कर्ण के शब्दबाणों से आहत होकर रथहीन भीमसेन अत्यन्त क्रोध से भर गए। वे अर्जुन से इस प्रकार बोले-॥2॥   |   mahabharat अध्याय 7.148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 148: अर्जुनका कर्णको फटकारना और वृषसेनके वधकी प्रतिज्ञा करना, श्रीकृष्णका अर्जुनको बधाई देकर उन्हें रणभूमिका भयानक दृश्य दिखाते हुए युधिष्ठिरके पास ले जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.148.2 
संजय उवाच
विरथो भीमसेनो वै कर्णवाक्शल्यपीडित:।
अमर्षवशमापन्न: फाल्गुनं वाक्यमब्रवीत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- हे राजन! कर्ण के शब्दबाणों से आहत होकर रथहीन भीमसेन अत्यन्त क्रोध से भर गए। वे अर्जुन से इस प्रकार बोले-॥2॥
 
Sanjaya said- O King! Bhimasena, who was without a chariot, was overcome with anger after being struck by Karna's verbal arrows. He spoke to Arjuna thus-॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)