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mahabharat 7.147.90-91h: अब आपके अन्याय से उत्पन्न इस महासंहार की कथा सुनिए। भीमसेन ने अब तक आपके इकतीस पुत्रों को मार डाला है, जिनमें दुर्मुख भी शामिल है, जो सदैव विचित्र अस्त्रों से युद्ध करता था।   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 90-91h
 
 
श्लोक  7.147.90-91h 
भूयश्चापि निबोधेमं तवापनयजं क्षयम्।
एकत्रिंशत् तव सुता भीमसेनेन पातिता:॥ ९०॥
दुर्मुखं प्रमुखे कृत्वा सततं चित्रयोधिनम्।
 
 
अनुवाद
अब आपके अन्याय से उत्पन्न इस महासंहार की कथा सुनिए। भीमसेन ने अब तक आपके इकतीस पुत्रों को मार डाला है, जिनमें दुर्मुख भी शामिल है, जो सदैव विचित्र अस्त्रों से युद्ध करता था।
 
Now listen to the story of this great massacre caused by your injustice. Bhimasena has killed thirty-one of your sons till now, including Durmukha, who always fought with strange weapons. 90 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)