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mahabharat 7.147.87: राजन! कर्ण के लिए एक सुन्दर रथ भी लाया गया, जिसमें उत्तम घोड़े जुते हुए थे, जो शंख और गौ के दूध के समान श्वेत वर्ण के थे, विचित्र स्वर्ण कवचों से सुसज्जित थे और अत्यन्त वेगवान थे॥87॥   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  7.147.87 
कर्णस्यापि रथं राजन् शंखगोक्षीरपाण्डुरै:।
चित्रकाञ्चनसंनाहै: सदश्वैैर्वेगवत्तरै:॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
राजन! कर्ण के लिए एक सुन्दर रथ भी लाया गया, जिसमें उत्तम घोड़े जुते हुए थे, जो शंख और गौ के दूध के समान श्वेत वर्ण के थे, विचित्र स्वर्ण कवचों से सुसज्जित थे और अत्यन्त वेगवान थे॥87॥
 
Rajan! A beautiful chariot was also brought for Karna, in which were harnessed excellent horses, white in complexion like conch shells and cow's milk, equipped with strange golden armor and extremely fast. 87॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)