Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.147.77: व्याघ्र! श्रीकृष्ण, कुन्तीकुमार अर्जुन और शिनिपुत्र सात्यकि- ये तीनों ही संसार में वास्तविक धनुर्धर हैं। इनके समान कोई चौथा पुरुष नहीं है। 77॥ | mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृष्णो वापि भवेल्लोके पार्थो वापि धनुर्धर:।
शैनेयो वा नरव्याघ्र चतुर्थस्तु न विद्यते॥ ७७॥
अनुवाद
व्याघ्र! श्रीकृष्ण, कुन्तीकुमार अर्जुन और शिनिपुत्र सात्यकि- ये तीनों ही संसार में वास्तविक धनुर्धर हैं। इनके समान कोई चौथा पुरुष नहीं है। 77॥
Tiger! Shri Krishna, Kuntikumar Arjun and Shini's grandson Satyaki - these three are the real archers in the world. There is no fourth person like him. 77॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥