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mahabharat 7.147.76: शत्रुओं को पीड़ा पहुँचाने वाले सात्यकि श्रीकृष्ण और अर्जुन के समान पराक्रमी थे। उन्होंने हँसते-हँसते आपकी समस्त सेनाओं को परास्त कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  7.147.76 
कृष्णयो: सदृशो वीर्ये सात्यकि: शत्रुतापन:।
जितवान् सर्वसैन्यानि तावकानि हसन्निव॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं को पीड़ा पहुँचाने वाले सात्यकि श्रीकृष्ण और अर्जुन के समान पराक्रमी थे। उन्होंने हँसते-हँसते आपकी समस्त सेनाओं को परास्त कर दिया।
 
Satyaki, the tormentor of enemies, was as valiant as Shri Krishna and Arjun. He defeated all your armies while laughing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)