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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 73-74h
 
 
श्लोक  7.147.73-74h 
वधे त्वकुर्वन् यत्नं ते तस्य कर्णमुखास्तदा॥ ७३॥
नाशक्नुवंस्ततो हन्तुं सात्यकिं प्रवरा रथा:।
 
 
अनुवाद
कर्ण जैसे महान योद्धाओं ने सात्यकि को मारने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे उसे मार नहीं पाए। 73 1/2
 
Great warriors like Karna tried their best to kill Satyaki but they were not able to kill him. 73 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)