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mahabharat 7.147.72-73h: उसने उन्हें रथहीन और अत्यंत व्यथित कर दिया, किन्तु उनके प्राण नहीं लिये। जब पुनः द्यूतक्रीड़ा हुई, तब भीमसेन ने आपके पुत्रों को मारने की प्रतिज्ञा की थी और अर्जुन ने कर्ण को मारने की घोषणा की थी।   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 72-73h
 
 
श्लोक  7.147.72-73h 
विरथान् विह्वलांश्चक्रे न तु प्राणैर्व्ययोजयत्।
भीमसेनेन तु वध: पुत्राणां ते प्रतिश्रुत:॥ ७२॥
अनुद्यूते च पार्थेन वध: कर्णस्य संश्रुत:।
 
 
अनुवाद
उसने उन्हें रथहीन और अत्यंत व्यथित कर दिया, किन्तु उनके प्राण नहीं लिये। जब पुनः द्यूतक्रीड़ा हुई, तब भीमसेन ने आपके पुत्रों को मारने की प्रतिज्ञा की थी और अर्जुन ने कर्ण को मारने की घोषणा की थी।
 
He rendered them chariotless and extremely distressed, but did not take their lives. When the game of dice was played again, Bhimasena had vowed to kill your sons and Arjuna had declared that he would kill Karna. 72 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)