Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.147.70-71: हे राजन! मन को वश में करने वाले सात्यकि ने उस समय रथहीन हुए कर्ण तथा दु:शासन आदि आपके वीर पुत्रों को नहीं मारा, क्योंकि वे भीमसेन और अर्जुन को पहले दी गई प्रतिज्ञा की रक्षा कर रहे थे। | mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा तु विरथं कर्णं पुत्रांश्च तव पार्थिव॥ ७०॥
दु:शासनमुखान् वीरान् नावधीत् सात्यकिर्वशी।
रक्षन् प्रतिज्ञां भीमेन पार्थेन च पुराकृताम्॥ ७१॥
अनुवाद
हे राजन! मन को वश में करने वाले सात्यकि ने उस समय रथहीन हुए कर्ण तथा दु:शासन आदि आपके वीर पुत्रों को नहीं मारा, क्योंकि वे भीमसेन और अर्जुन को पहले दी गई प्रतिज्ञा की रक्षा कर रहे थे।
O King! Satyaki, who had controlled his mind, did not kill Karna who had become chariotless and your brave sons like Dushasan etc. at that time because he was protecting the promise made earlier to Bhimasena and Arjun.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥