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mahabharat 7.147.69-70h: उन्होंने आपके पुत्र द्वारा बचपन से ही दिखाई गई दयालुता का आदर किया और दुर्योधन को राज्य दिलाने के लिए जो वचन दिया था, उसे पूरा करने के लिए तत्पर थे। 69 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 69-70h
 
 
श्लोक  7.147.69-70h 
मानयंस्तव पुत्रस्य बाल्यात् प्रभृति सौहृदम्॥ ६९॥
कृतां राज्यप्रदानेन प्रतिज्ञां परिपालयन्।
 
 
अनुवाद
उन्होंने आपके पुत्र द्वारा बचपन से ही दिखाई गई दयालुता का आदर किया और दुर्योधन को राज्य दिलाने के लिए जो वचन दिया था, उसे पूरा करने के लिए तत्पर थे। 69 1/2
 
He respected the kindness shown by your son since his childhood and was ready to fulfil the promise he had made to get the kingdom for Duryodhan. 69 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)