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mahabharat 7.147.68-69h: महाराज! उस समय सारी सेना में बड़ा कोलाहल मच गया। महाराज! सात्यकि के बाणों से रथहीन हुआ कर्ण तुरन्त ही गहरी साँस लेता हुआ दुर्योधन के रथ पर बैठ गया।   |   mahabharat अध्याय 7.147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 68-69h
 
 
श्लोक  7.147.68-69h 
हाहाकारस्ततो राजन् सर्वसैन्येष्वभून्महान्।
कर्णोऽपि विरथो राजन् सात्वतेन कृत: शरै:॥ ६८॥
दुर्योधनरथं तूर्णमारुरोह विनि:श्वसन्।
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय सारी सेना में बड़ा कोलाहल मच गया। महाराज! सात्यकि के बाणों से रथहीन हुआ कर्ण तुरन्त ही गहरी साँस लेता हुआ दुर्योधन के रथ पर बैठ गया।
 
King! At that time there was a great uproar in the entire army. Maharaj! Karna, who was chariotless due to Satyaki's arrows, immediately sat on Duryodhan's chariot, taking a deep breath. 68 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)